Thursday, 28 April 2011

कहना मैंने याद किया है।


अगर छाँव में धूप मिले, तो कहना मैंने याद किया है।
वही कोकिली कूक मिले, तो कहना मैंने याद किया है॥
शब्द-शब्द मूरत गढ़ करके,
जिसके गीतों को सुन करके।
दिल में नई तरंगें उठती ,
ऐसी कोई पंक्ति मिले ,तो कहना मैंने याद किया है ॥
देहरी तक आ करके ठिठकी ,
क्यों करके आती है हिचकी ।
जिसने मुझको याद किया हो
ऐसा कोई मीत मिले, तो कहना मैंने याद किया है ॥
चांदी में घोला हो सोना,
कुछ चंचल हो कुछ अलसौना ।
लज्जा कुंदन भी फीका हो
नैना जैसे सीप मिले, तो कहना मैंने याद किया है ॥
जैसे-जैसे घूँघट सरके ,
त्यों -त्यों कितने दर्पण दरके ।
जिसकी पलकें ही घूँघट हों
ऐसा कोई रूप मिले,तो कहना मैंने याद किया है ॥

Tuesday, 26 April 2011

Happy Mother,s Day

माँ तब तुम्हारी याद आई 
सुबह सवेरे आँख खुली 
और तेरी सूरत नज़र न आई 
माँ तब तुम्हारी याद आई 
सांझ ढले जब घर लोटा 
और तू घर पर नज़र न आई 
माँ तब तुम्हारी याद आई 
दुनिया भर की धुप लगी 
और तेरी आँचल छाव न पाई 
माँ तब तुम्हारी याद आई 
चौखट पर जब मेरे घर की 
तेज जब भी हवा आई 
माँ तब तुम्हारी याद आई 

Saturday, 16 April 2011

मेरा कफ़न

जाने क्यों उदास और तनहा है मेरा कफ़न
शायद मेरे इंतज़ार में है मेरा कफ़न
तुजसे ज्यादा वफ़ा निभा रहा है मुझसे 
मेरे साथ चिता में जल रहा है मेरा कफ़न
खूब लग रहा है सफेदी में सुर्ख रंग 
देख तेरी हिना से जगमगा रहा है मेरा कफ़न
नज़र न लग जाये मेरी लाश को किसी बेवफा की 
तुझ से  मेरा चेहरा छुपा रहा है मेरा कफ़न 
हर निशानी मेरे वजूद की मेरे साथ जल जायगी आज
मेरा आखिरी निशान भी मिटा रहा है मेरा कफ़न
शायद कभी तुजसे मुलाकात हो की ना हो
तुजसे बहुत दूर मुझे ले जा रहा है मेरा कफ़न

क्या होता अगर हंसा देता कोई

दुआ नहीं तो गिला देता कोई ,मेरी मेहनत का सिला देता कोई
जब मुक्कदर ही नहीं था अपना , देता भी तो भला क्या देता कोई
तक़दीर नहीं थी अगर आसमान छूना ,खाक में ही मिला देता कोई
गुमान ही हो जाता किसी अपने का , दामन ही पकड़ कर हिला जाता कोई
अरसे से अटका है हिचकियो पे ,अच्छा होता जो भुला देता कोई
ये तो रो रो के कट गयी जिंदगी अपनी ,क्या होता अगर हंसा देता कोई  

वक्त के कारवां से आगे हूँ .

वक्त के कारवां से आगे हूँ .
बेरहम आसमा से आगे हूँ
हूँ कहाँ ये तो खुदा जाने .....
पर जहाँ कल था 
वहां से आज आगे हूँ  

Tuesday, 12 April 2011

बस लिख रहे हैं प्यार तुम्हे

 बहुत दिन से कुछ लिख नहीं पाए....उसके लिए माफ़ी चाहते  है
एक शेर आपके  समक्ष.....
हैं दूर बहुत मजबूर बहुत
क्या भेंट करे उपहार तुम्हे
स्वीकार इसी को कर लेना
बस लिख रहे हैं प्यार तुम्हे

Friday, 1 April 2011

हम भी हैं भाई ब्लोगर,

                                         हम तो कुछ थे नहीं , बस सब आप का ही साथ है