Wednesday, 25 July 2012

कभी मंजिल को पाने में ज़माने बीत जाते हैं

कभी नज़रें मिलाने में ज़माने बीत जाते हैं,
कभी नज़रें चुराने में ज़माने बीत जाते हैं,

किसी ने आँख भी खोली तो सोने की नगरी में,
किसी को घर बनाने में ज़माने बीत जाते हैं,

कभी काली स्याह रातें भी पल पल की लगती हैं,
कभी सूरज को आने में ज़माने बीत जाते हैं,

कभी खोला घर का दरवाजा तो मंजिल सामने थी,
कभी मंजिल को पाने में ज़माने बीत जाते हैं,

चंद लम्हों में टूट जाते हैं उम्र भर के वो बंधन,
वो बंधन जो बनाने में ज़माने बीत जाते हैं....!!!!

Saturday, 31 March 2012

माँगा था रोशन जहाँ , मुझको अंधियारी रात मिली ......

मेरे ख्वाबो को देखो यारो , कैसी ये सौगात मिली !
माँगा था रोशन जहाँ , मुझको अंधियारी रात मिली !!
 
ये पागल मन भी देखो , यूं बन बैठा दीवाना !
लाख समझाने पर भी , ये मेरी एक ना माना !!
 
कसूर नहीं था उसका भी , इलज़ाम क्यों मैं उसको दूँ !
अब वादे, यादे पास नहीं ,उस तूफां का हिसाब किसको दूँ !!
 
अब मिलना जुलना , भी देखो कैसा है दुशवार हुआ !
इश्क हुआ था तब मुझको , क्यों अब तक ना इज़हार हुआ !!
 
यूं देख देख कर ही तुमको , मन की बैचनी बढती थी !
शायद तुम भी सोच कर मुझको, एक ख्वाब नया सा घढती थी !!
 
पर मंजिल हम प्यार की चढ़ ना सके !
वो सपने भी सच हो ना सके !!
 
हमारे प्यार का दुश्मन , ये सारा संसार हुआ !
जिधर को निकला मैं , उधर न्यारी ही बात मिली !!
 
मेरे ख्वाबो को देखो यारो , कैसी ये सौगात मिली !
माँगा था रोशन जहाँ , मुझको अंधियारी रात मिली !!
 
 

Saturday, 7 January 2012

इन्तहां ना लेना मेरी बेबसी का......

इन्तहां ना लेना मेरी बेबसी का !
तोड़ ना देना यूँ ही दिल किसी का !!

मुझको तो तेरी तम्मना थी यारा ! 
इंतजार करते तेरा मैं तो हारा !!
तुम आये थे जिस पल .......!
वो पल था खुसी का ..........!!

इन्तहां ना लेना मेरी बेबसी का !
तोड़ ना देना यूँ ही दिल किसी का !!

टूटता है जब दिल , दर्द बड़ा होता !
हर तरफ मायूसी , हर कोई रोता !!
फैसला तब होता है ..........!
इस जिंदगी का ..................!!

इन्तहां ना लेना मेरी बेबसी का !
तोड़ ना देना यूँ ही दिल किसी का !!

काश की मुझको तुम जाते !
समझते मुझे , मुझे दिल से लगाते !!
अंजाम होता है ये .....!
हर पल हंसी का ........!!.

इन्तहां ना लेना मेरी बेबसी का !
तोड़ ना देना यूँ ही दिल किसी का !!

Monday, 2 January 2012

सागरों में अब गहराइया नहीं रही ....

हम तो डूबने चले थे .मगर ........!
सागरों में अब गहराइया नहीं रही !!  
 
ये आँखें आज फिर रोने को है !
मन ये फिर आज सोने को है !!
जिंदगी की शाम होने को है !
वक़्त के फैसले, अब ये ही सही !!
 
हम तो डूबने चले थे .मगर ........!
सागरों में अब गहराइया नहीं रही  !!
 
तुझसे उम्मीद थी मुझको बहुत !
मगर अब उम्मीद क्या रखूँ !!
निशाँ ही मिट गये मंजिल के !
मंजिल जो , आज तक मिली नहीं !!
 
हम तो डूबने चले थे .मगर ........!
सागरों में अब गहराइया नहीं रही !!
 
मालूम मुझको नहीं , मगर !
मिले थे तुम उस मोड़ पर !!
अनजान बना दिया मुझको !
मगर अजनबी तुम तो नहीं !!
 
हम तो डूबने चले थे .मगर ........
सागरों में अब गहराइया नहीं रही  

Friday, 30 December 2011

फिर किसलिए है ये इंतज़ार ....

एक बार बता जा मेरे यार !
क्या तुझको भी है मुझसे प्यार !!

गर है तुझको भी मुझसे प्यार !
फिर किसलिए है ये इंतज़ार !!

भवर बीच है कश्ती मेरी !
और उस पार है बस्ती तेरी !!
तू देख रहा है साहिल से !
कब कश्ती होगी मेरी पार !!

गर है तुझको भी मुझसे प्यार !
फिर किसलिए है ये इंतज़ार !!

कुछ याद है मुझको वो सपने ! 
कुछ साथ थे मेरे भी अपने !!
वो ख्वाब टूटे , और आप भी छूटे !
इश्क का चढ़ा है जबसे खुमार !!

गर है तुझको भी मुझसे प्यार !
फिर किसलिए है ये इंतज़ार !! 



Wednesday, 21 December 2011

कहीं ये अश्क ही ना बन जाये ग़ज़ल ..

यू तो हंसती है मेरी आँखें हरपल !
कहीं ये अश्क ही ना बन जाये ग़ज़ल !!

तुम भी कुछ बोलो , चुप क्यों हो !
इस मुश्किल का कोई , निकालो हल !!  

राह चलते में साथ , होगा काफिला !
क्या करोगे ,तन्हाई जब होगी कल !!

रश्क ना कर, तुझको भी मंजिल मिलेगी !
यूं ही नहीं मिलता , मेहनत का भी फल !!

मैं जानता हूँ, कुछ रूठे से है वो मुझसे ! 
मना रहा हूँ , शायद मान जायेंगे कल  !!

यू तो हंसती है मेरी आँखें हरपल !
कहीं ये अश्क ही ना बन जाये ग़ज़ल !!