Friday, 20 September 2013

प्रीत और प्यार के किस्से, कभी हकीकत नही होते..........

आसमा से टूटता, सितारा यही पैगाम लाता है !
मैं जब भी गीत रचता हूँ, तेरा ही नाम आता है !!

कभी ये प्यार के किस्से, होते सच मुहब्बत में !
खुदा तू ही है बस मेरा, मेरी  हर इबादत में  !!

मैं जब हूँ सोचता तुझको, अजब एहसास है होता !
काश: ख्वाब ये मेरा, कभी यूँ सच हुआ होता !!

मगर मैं भूल जाता हूँ, ये सपने सच नही होते !
प्रीत और प्यार के किस्से, कभी हकीकत नही होते !!

ना जाने फिर भी ये दिल, क्यों इनको संजो बैठा !
मना लाख किया लेकिन, हठ फिर भी पकड़ बैठा !!

मैं क्या करूँ अब तो, मुहब्बत कर ली जो तुमसे !
दो मीठे बोल तुम सजनी, कभी बोलो जरा हमसे !!

मेरा ये हाल है अब जो, वजह इसकी भी तुम ही हो !
मेरी हर साँस में तुम हो, मेरी धड़कन में तुम ही हो !!

पी के ''तनहा''

2 comments:

  1. मगर मैं भूल जाता हूँ, ये सपने सच नही होते !
    प्रीत और प्यार के किस्से, कभी हकीकत नही होते !!
    sahi kaha hai aapne .

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